उपन्यास ‘चंद्र के विविध चेहरे’ के लिए लेखक डॉ छोटू प्रसाद चंद्रप्रभ गिरि सम्मान से सम्मानित
अखिल भारतीय पोस्टल एवं आरएमएस पेंशनर्स एसोसिएशन गिरिडीह मंडल ने किया सम्मान
कवि सह मुशायरा में कवियों ने सुनाई एक से बढ़कर एक कविता
गिरिडीह : राष्ट्रीय हिंदी दिवस के अवसर पर रविवार को आरसीएम वंडर वर्ल्ड के सभागार में अखिल भारतीय पोस्टल एवं आरएमएस पेंशनर्स एसोसिएशन गिरिडीह मंडल की ओर से साहित्यकार सम्मान समारोह एवं कवि सह मुशायरा का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुंदर लाल पाठक, गिरिडीह कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो अनुज कुमार, रेडक्रॉस के चेयरमैन सह साहित्यकार अरविंद कुमार, लेखक डॉ छोटू प्रसाद चंद्रप्रभ, सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ आरती वर्मा मौजूद थे।
हिंदी दिवस मेरे लिए अविस्मरणीय : डॉ छोटू प्रसाद चंद्रप्रभ

समारोह की शुरुआत अंत्रिका सिंह ने सरस्वती वंदना से की। उसके बाद आंचलिक उपन्यास ‘चंद्र के विविध चेहरे’ के लेखक डॉ छोटू प्रसाद चंद्रप्रभ को गिरि सम्मान से सम्मानित किया गया। लेखक चंद्रप्रभ को मोमेंटो, प्रमाणपत्र के साथ शॉल ओढ़ाकर अतिथियों ने सम्मानित किया।
लेखक चंद्रप्रभ ने कहा के कि यह हिंदी दिवस मेरे लिए अविस्मरणीय है। यह सम्मान केवल मेरा नहीं है, बल्कि उन सभी पाठकों, गुरुजनों, सह-लेखकों और परिजनों का है, जिन्होंने मुझे निरंतर प्रोत्साहित किया और मेरी साहित्यिक यात्रा को सार्थक बनाया। यदि मेरी लेखनी ने मानवता, करुणा और सत्य की दिशा में थोड़ी भी रोशनी फैलाई है, तो यही मेरे लेखन की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
इसी बीच डॉ छोटू प्रसाद चंद्रप्रभ के पुत्र अनंत शक्ति ने पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुंदर लाल पाठक को उपन्यास ‘चंद्र के विविध चेहरे’ भेंट की।

उपन्यास में आंचलिकता झलकती है : सुंदर लाल पाठक
पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुंदर लाल पाठक ने कहा कि उनके उपन्यास में आंचलिकता झलकती है। प्रो अनुज सर ने लेखक की प्रतिभा की प्रशंसा की। डॉ आरती वर्मा ने कहा कि लेखक को पुरस्कार मिलना उनके लेखन का सम्मान है। रेडक्रॉस के चेयरमैन अरविंद कुमार ने कहा कि साहित्य और संगीत की सेवा के लिए वे हमेशा तत्पर रहेंगे। कुत्ते नहीं लड़ेंगे चुनाव कविता सुनाकर उन्होंने खूब वाहवाही लूटी। समारोह का संचालन कर रहे पेंशनर्स एसोसिएशन के सचिव नवीन कुमार सिन्हा ने हर वर्ष एक नए लेखकों को गिरि सम्मान देने की घोषणा की।

उसके बाद कवि सह मुशायरा में एक से बढ़कर एक कविता और मुशायरा मोइनुद्दीन शमसी, डॉ बलभद्र, उदय शंकर उपाध्याय, अंत्रिका सिंह, डॉ महेश सिंह, कलीमुद्दीन गौहर, संजय करुणेश, सरफराज चांद, विशाल पंडित, प्रदीप गुप्ता, महेश अमन, जावेद हुसैन जावेद, गगन शाहा, परवेज शीतल, हलीम असद हलीम, मशकूर मनकेश, मकसूद अम्बर, कैसर इमाम कैसर, रियाज शमसी, जफर कलीम, मुबारक हुसैन कबीश, अख्तर मास्टर अंसारी, मेंहदी हसन सहित अन्य कई कवियों ने पेश किया। संचालन रितेश सराक एवं परवेज शीतल ने किया।

मौके पर समाजसेवी रामदेव विश्वबंधु, शंकर पाण्डेय, कृष्णकांत, नाटककार बद्री दास, पत्रकार आलोक रंजन, साहित्यकार सुनील मंथन शर्मा, अनंत शक्ति, फ़रोगे-अदब के मुख्तार हुसैनी, पेंशनर्स एसोसिएशन के सहायक सचिव किशोर कुमार साहू, सदस्य राम दुलार मिस्त्री, राजेंद्र प्रसाद वर्मा सहित अन्य कई लोग उपस्थित थे।
