Friday, March 6, 2026
झारखंडन्यूज़

समस्याएं ही साहित्य को जन्म देती हैं : डॉ चंद्रप्रभ

गिरिडीह के लेखक डॉ छोटू प्रसाद चंद्रप्रभ लिखित आत्मकथात्मक पुस्तक ‘जिंदगी फिर से लिखने का मन’ का लोकार्पण

डॉ छोटू प्रसाद चंद्रप्रभ लिखित पुस्तक ‘जिंदगी फिर से लिखने का मन’ का लोकार्पण करते अतिथिगण।

गिरिडीह : अभिनव साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में आरसीएम वंडर वर्ल्ड के सभागार में गिरिडीह के लेखक डॉ छोटू प्रसाद चंद्रप्रभ लिखित आत्मकथात्मक पुस्तक ‘जिंदगी फिर से लिखने का मन’ का रविवार को लोकार्पण किया गया। लोकार्पण मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त शिक्षक तुलसी महतो, रेडक्रॉस के चेयरमैन अरविंद कुमार, गिरिडीह कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ अनुज कुमार, खोरठा साहित्यकार डॉ महेंद्र नाथ गोस्वामी सुधाकर, गिरिडीह कॉलेज की प्रोफेसर स्वेता, लेखक डॉ छोटू प्रसाद चंद्रप्रभ, साहित्यकार एवं इंडियन माइंड के संपादक सुनील मंथन शर्मा, अधिवक्ता संजय कुमार, नाटककार प्रदीप गुप्ता, कवि नवीन सिन्हा आदि ने संयुक्त रूप से किया। उसके बाद स्वागत भाषण अनंत प्रिया ने दिया।

अपनी पुस्तक के बारे में बताते लेखक डॉ छोटू प्रसाद चंद्रप्रभ।

सुनील मंथन शर्मा के संचालन में पुस्तक के साथ साहित्य- जीवनदर्शन एवं मार्गदर्शन विषय पर परिचर्चा की गई।
लेखक डॉ छोटू प्रसाद चंद्रप्रभ ने अपने वक्तव्य में बताया कि
‘ज़िन्दगी फिर से लिखने का मन’ मेरी सातवीं पुस्तक है। आगे श्री चंद्रप्रभ ने कहा कि समस्याएं ही साहित्य को जन्म देती हैं। आज जीवित रहना मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या है। मनुष्य जीवित रहने के लिए संघर्ष करता है। संघर्ष से जब सुख घर में आता है तो सेहत रूठ जाती है। जीवन एक अधूरी किताब की तरह है, जिसमें कई बार गलतियां रह जाती हैं। अधूरे सपने और अधूरे अध्याय रह जाते हैं। इसी को आगे बढ़ाने की भावना जागृत हो जाती है। यह पुस्तक इसी भावना का प्रतीक है।

पुस्तक विमोचन एवं परिचर्चा का संचालन करते इंडियन माइंड के संपादक सुनील मंथन शर्मा ने कहा, पुस्तक में बीमारी से लड़ने का संघर्ष तो है ही उससे निकलने का समाधान भी है। लेखक ने सारगर्भित लेखन किया है।

अतिथि तुलसी महतो ने कहा कि पुस्तक में लेखक का संघर्ष तो दिखता ही है, उससे निपटने का समाधान भी दिखता है। प्रो. अनुज कुमार ने आत्मकथात्म कृतियों पर अपना विचार व्यक्त किया। रेडक्रॉस के चेयरमैन अरविंद कुमार ने कहा कि पुस्तक के प्रति लोगों को अपनी रुचि जागृत करनी चाहिए। डॉ महेंद्रनाथ गोस्वामी सुधाकर ने कहा कि जिसमें मानव समाज का हित अंतर्निहित हो, वही सत्साहित्य है।


इनके अलावा प्रो. स्वेता, नवीन सिन्हा, संजय कुमार, प्रदीप गुप्ता आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। धन्यवाद ज्ञापन अनंत शक्ति ने किया। मौके पर महेंद्र शर्मा, रेखा देवी, निशा अनंत, संगीता वर्मा, सर्वदा, अद्वैत आदि मौजूद थे।

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