‘हम काले नहीं हैं सर, प्रदूषण ने हमें काला कर दिया है’
– रिबान्ता स्टील प्राइवेट लिमिटेड के विस्तारीकरण का भारी विरोध
– एक स्वर में लगभग 200 से अधिक लोगों ने कहा- प्रदूषण से हमलोग मर रहे हैं, जान दे देंगे, लेकिन स्पंज प्लांट नहीं लगने देंगे

गिरिडीह : ”हम काले पैदा नहीं हुए थे, प्रदूषण ने हमें काला कर दिया है। सर, हमारे क्षेत्र में आइए और देखिए। हमलोग थोड़ा सा कपड़ा पहनते हैं तो दो मिनट में काला पड़ जाता है। लोग कहते हैं मांझी लोग नहीं नहाते… पर हम नहाते हैं सर। हम भी गोरे-गोरे थे, पर अब काले हो गए हैं। प्रदूषण ने हमारा चेहरा छीन लिया, बाल भूरे कर दिए हैं। हम खराब नहीं हैं सर, हम पीड़ित हैं… बहुत पीड़ित। इसलिए, जान दे देंगे, लेकिन स्पंज प्लांट नहीं लगने देंगे। झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से हाथ जोड़कर विनती है, लाखों लोगों की जिंदगी आपके एक साइन में बंधी है। रोक दीजिए सर, इस कागज पर साइन मत कीजिएगा… नहीं तो हम सब मर जाएंगे।”
कांपती आवाज में यह चीत्कार था, गंगापुर की विवाहित महिला पूजा मुर्मू का, जो झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से रिबान्ता स्टील प्राइवेट लिमिटेड के विस्तारीकरण के लिए सोमवार को मौजा भोरनडीहा एवं विश्वासडीह स्थित रिबान्ता के प्लांट साइट में लगाई गई लोक सुनवाई बोल रही थी। प्रदूषण से बचने की दुहाई मांग रही थी।

लोक सुनवाई की अध्यक्षता गिरिडीह सदर अनुमंडल पदाधिकारी श्रीकांत यशवंत विस्पुते कर रहे थे, जबकि झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय पदाधिकारी विवेक कुजूर, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अभियंता कुंदन कुमार दास, गिरिडीह जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक शम्भु शरण बैठा मौजूद थे।

सुनवाई स्थल पर लगभग 200 से अधिक लोग जुट हुए थे। सभी का हाथों में जान दे देंगे लेकिन स्पंज प्लांट नहीं लगने देंगे की तख्ती लिखी हुई थी।
सुनवाई शुरू होते ही सभी ने एक स्वर में विरोध करना शुरू कर दिया। लेकिन, एसडीओ के समझाने के बाद कंपनी के प्रतिनिधि ने प्लांट विस्तारीकरण के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उसके बाद बारी-बारी से सभी ने अपनी-अपनी बातें रखी और विरोध दर्ज कराया। सभी ने यह भी कहा कि लोक सुनवाई खुले स्थान में होनी चाहिए थी, पर प्लांट के अंदर किस नियम के तहत कराई जा रही है।

गंगापुर की पूजा कुमारी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की बात बेमानी है। प्रदूषण के खिलाफ यहां विरोध करने के लिए महिलाओं को आना पड़ा है। हमलोग प्रदूषण से त्रस्त हैं। जान दे देंगे, लेकिन स्पंज प्लांट नहीं लगने देंगे। शुभांकर कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गिरिडीह और रामगढ़ में औद्योगिक इकाई के लिए भूजल का इस्तेमाल पर प्रतिबंध है तो कहां से लाया जाएगा पानी। गलत तरीके से प्लांट लगाने और चलाने नहीं दिया जाएगा।

उसके बाद सुनील साव, चन्दर वर्मा, दिलीप साव, कोलेश्वर सोरेन, विनोद शर्मा, बबलू साव, कमल किशोर मल्लाह, मंतोष राणा, मिथुन तिवारी, कान्हाय पांडेय, राजेश सिन्हा, दिलीप उपाध्याय, विक्की कुमार राणा, हसनैन अली, रणजीत राय, विजय राय, आजाद आलम, विकास कुमार राय, अरुण कुमार साव, बुधन मल्लाह, उमेश राणा आदि ने एक स्वर में प्लांट विस्तारीकरण का भारी विरोध किया। सभी ने कहा कि प्रदूषण के कारण जल, जंगल, जमीन सभी बेकार जो गए हैं। पीने का शुद्ध पानी नहीं है। पेड़-पौधे झुलस गए हैं। बोरिंग करने पर पानी नहीं निकलता है। लोग टीबी से ग्रसित हैं। बच्चे अपंग पैदा हो रहे हैं।

उसके बाद कंपनी के प्रतिनिधि ने जैसे ही बताया कि प्लांट के विस्तारीकरण में ईएसपी मशीन के साथ हाई टेक्नोलॉजी की मशीनें लगाई जाएगी, सभी एक साथ उठ खड़े हुए और सीधे कहा स्पंज प्लांट नहीं लगने देंगे तो नहीं लगने देंगे।
एसडीओ ने कई लोगों के उठाए गए सवाल के जवाब में बताया कि प्रशासन ने प्रदूषण को लेकर कई फैक्ट्रियों को नोटिस किया है और गड़बड़ियों का सुधार कराया है। उन्होंने कहा कि जैसा आपलोगों ने कहा है, वही रिपोर्ट विभाग को भेजी जाएगी।
सुरक्षा के लिए पुलिस भी मौजूद थी।
