बालमुकुंद फैक्ट्री में उसरी नदी से पानी उठाने पर रोक लगाने की मांग
ग्रामीणों ने उपायुक्त को सौंपा सामूहिक आवेदन, सभी अनुमति व एनओसी को सार्वजनिक करने एवं जांच कराने की उठाई मांग
गिरिडीह : उसरी नदी बचाओ, उसरी वाटर फॉल बचाओ आंदोलन के तहत ग्रामीणों ने गिरिडीह उपायुक्त को एक सामूहिक आवेदन सौंपकर उसरी नदी से औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उठाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
आवेदन में चतरो स्थित बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री द्वारा उसरी नदी से पानी उठाने, पाइपलाइन बिछाने और इंटेकवेल बनाए जाने को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर चिंता जताई है।
आंदोलन का नेतृत्व करने वाले विजय विशाल राय के साथ माले नेता राजेश सिन्हा, सुनील शर्मा, चंदर वर्मा, हसनैन अली, टिंकू साव, अरुण साव आदि ने उपायुक्त को आवेदन सौंपा। उपायुक्त ने ग्रामीणों को इसकी जांच कराने एवं बुधवार की सुबह पूर्वांचल क्षेत्र का निरीक्षण करने का आश्वासन दिया है।
आवेदन में कहा गया है कि उसरी नदी गिरिडीह जिले की महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलधारा होने के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है। नदी से बड़े पैमाने पर पानी उठाए जाने से भविष्य में नदी के प्राकृतिक जलप्रवाह, प्रसिद्ध उसरी वाटर फॉल, भूजल स्तर, कृषि, पशुपालन और आम लोगों की जल उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। क्षेत्र का भूजल स्तर नीचे चला गया है। सीएसआर फंड का भी कोई उपयोग नहीं हो रहा है।
मांग की गई है कि उसरी नदी से पानी उठाने से संबंधित जल आवंटन पत्र, अनुमति, एनओसी एवं सभी सरकारी आदेशों की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि पानी उठाने की अनुमति किस विभाग अथवा प्राधिकरण ने, किस तिथि को और कितनी मात्रा में दी है।
सभी विभागों से अनुमति की संयुक्त जांच की मांग
आवेदन में जल संसाधन विभाग, डीवीसी, डीवीआरआरसी, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भू-जल बोर्ड, पथ निर्माण विभाग, संबंधित अंचल कार्यालय एवं जिला प्रशासन से जुड़ी सभी अनुमतियों की संयुक्त जांच कराने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने संबंधित आदेशों की प्रमाणित प्रति सार्वजनिक करने तथा उसरी नदी के जल पर डीवीसी/डीवीआरआरसी की कानूनी भूमिका भी स्पष्ट करने की मांग की है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि जांच पूरी होने तक उसरी नदी से पानी उठाने और इससे संबंधित इंटेक व पाइपलाइन का काम तत्काल प्रभाव से रोका जाए। साथ ही नदी में वर्तमान जलप्रवाह तथा गर्मी और सूखे के समय उपलब्ध पानी की मात्रा का वैज्ञानिक एवं तकनीकी सर्वेक्षण कराया जाए।
जल दोहन से ग्रामीणों और वाटर फॉल पर असर नहीं पड़ने देने की मांग
आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी औद्योगिक जल-दोहन से ग्रामीण आबादी, उसरी वाटर फॉल, कृषि, पशुपालन, भूजल एवं नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। साथ ही उसरी नदी और वाटर फॉल को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से दीर्घकालीन संरक्षण एवं जल प्रबंधन योजना तैयार करने की मांग की गई है।
2 अगस्त को हुई थी मानव श्रृंखला
आंदोलनकारियों ने बताया है कि इस मुद्दे को लेकर 2 अगस्त 2026 को उसरी वाटर फॉल मोड़ से डांडीडीह तक विशाल मानव श्रृंखला आयोजित की गई थी। इसमें गिरिडीह क्षेत्र के बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, बुजुर्ग, छात्र-छात्राएं, सामाजिक संगठनों एवं राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल हुए थे। आंदोलनकारियों ने कार्य पर रोक नहीं लगने की स्थिति में लगातार विरोध प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प लिया था।
