Thursday, August 13, 2026
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गादी श्रीरामपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 10 दिनों में होगा चालू

तीन पंचायतों के 21 गांवों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति बहाल करने की कवायद तेज, खराब उपकरणों की मरम्मत व प्रतिस्थापन का निर्देश

गिरिडीह। गादी श्रीरामपुर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को अधिकतम 10 दिनों के भीतर पुनः चालू किया जाएगा। बुधवार को उपायुक्त रामनिवास यादव ने पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल संख्या-2 के तहत संचालित प्लांट का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने प्लांट की वर्तमान स्थिति, जल शोधन व्यवस्था, मशीनरी, उपकरणों और जलापूर्ति व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से योजना के लंबे समय से बंद रहने के कारणों तथा तकनीकी स्थिति की जानकारी ली।

वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण करते उपायुक्त।

पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल संख्या-2 के कार्यपालक अभियंता सुनील कुमार ने बताया कि वर्ष 2018 से संचालित इस योजना के माध्यम से क्षेत्र की कई पंचायतों के ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, अक्टूबर 2024 से तकनीकी कारणों से योजना का संचालन बाधित है।

उपायुक्त ने निर्देश दिया कि प्लांट से संबंधित सभी तकनीकी एवं प्रशासनिक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। खराब पड़े पार्ट्स और उपकरणों की आवश्यकतानुसार मरम्मत अथवा प्रतिस्थापन कर अधिकतम 10 दिनों में प्लांट को पुनः चालू करना सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि पेयजल आमजनों की मूलभूत आवश्यकता है। पेयजल योजना का लंबे समय तक बंद रहना गंभीर विषय है। प्लांट के चालू होने के बाद ग्रामीणों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ तकनीकी खामियों का स्थायी समाधान भी सुनिश्चित किया जाए।

री-टेंडर प्रक्रिया भी समय पर पूरी करने का निर्देश

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि योजना के बेहतर एवं सतत संचालन के लिए नई कार्यकारी एजेंसी के चयन हेतु री-टेंडर की प्रक्रिया की जानी है। चयनित एजेंसी द्वारा लगभग एक वर्ष तक योजना का संचालन एवं रखरखाव किया जाएगा। उपायुक्त ने री-टेंडर की प्रक्रिया को निर्धारित नियमों एवं प्रावधानों के तहत समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया।

उन्होंने प्लांट के पुनः संचालन के बाद नियमित तकनीकी मॉनिटरिंग और रखरखाव पर भी जोर दिया। जल शोधन की गुणवत्ता, मशीनरी की कार्यक्षमता तथा जलापूर्ति की निरंतरता की नियमित निगरानी करने और किसी भी तकनीकी खराबी का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने को कहा।

उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित पेयजल योजनाओं का लाभ अधिकतम लोगों तक पहुंचाना है। बंद एवं बाधित योजनाओं को चिह्नित कर उनके शीघ्र पुनः संचालन तथा दीर्घकालिक सुचारु संचालन के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान कार्यपालक अभियंता सुनील कुमार सहित संबंधित पदाधिकारी, अभियंता एवं कर्मी उपस्थित थे।

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